नन्ही परी सोने चली, हवा धीरे आना..

Spread the love

हॉस्पिटल से आयी प्रेरणा अपने बच्चे के कमरे में फैले खिलौनों को उठाते हुए जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ती हैं उसका पैर जमीन पर गिरी डॉल के ऊपर पड़ता है उसमे से आवाज़ आती है -आई लव यू मम्मा, आई लव यू मम्मा! और प्रेरणा वही जमीन पर बैठ कर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगती है |

रोते-रोते उसी गुड़िया को थपकी देते हुए लोरी सुनाने लगती है “नन्ही परी सोने चली, हवा धीरे आना, नींद भरे…. अब उसकी लोरी के बोल पर भी उदासी के बादल छाए हुए थे | ये लोरी उसने पहले भी गा कर सुनाई थी.. अपने पति विनय को |

विनय-बेबी आएगा तो उसे कैसे सुलाओगी ? (विनय ने अपना सर प्रेरणा की गोद में रख कर कहा )

प्रेरणा- बेबी को सुलाना है, तुम्हे नहीं, हटो, बहुत सारा काम है |

विनय-अरे, प्रैक्टिस मैक्स ए वुमन परफेक्ट ! मुझे सुलाकर दिखाओ तो जानू |

प्रेरणा- प्रेरणा ने अपना हाथ विनय के सर पर रखा और लोरी सुनानी शुरू की “नन्ही परी सोने चली.. हवा धीरे आना.. नींद भरे पंख लिए, झूला झूला जाना | प्रेरणा की आवाज़ में इतनी मिठास थी, इतना प्यार, इतना सुकून था कि विनय को सच-मुच नींद आ गयी |

प्रेरणा और विनय की शादी को 2 साल हो गए थे | घर का हर सदस्य यही कहता प्रेरणा अकेले नहीं आई, खुशियाँ साथ में लायी है | और वो खुशियाँ दुगनी हो गयी जब घरवालों को ये पता चला कि प्रेरणा माँ बनने वाली है | होने वाली दादी, दादा, पापा.. किसी के भी पैर जैसे जमीन पर नहीं टिक रहे थे | बच्चा सर्दियों में होना है तो उसके 10-12 बेबी सेट बुनने पड़ेंगे और दादी लग गयी इसी काम में… दादा ने तो बच्चे के कमरे के लिए रंग, डिज़ाइन सब फाइनल कर दिया.. अभी से काम शुरू करेंगे बेटा, तभी हो पाएगा | होने वाले पापा जहा जाते उन्हें नए खिलौने दिख जाते..

अरे, पूरा कमरा खिलौने से भरा होना चाहिए मेरे बच्चे का, जिस पर हाथ रखे वो लाके दूंगा उसे !

पहली प्रेगनेंसी थी तो जो आता वो एक नयी सलाह दे जाता | गीता पढ़ो, ऐसे मत बैठो, भारी सामान मत उठाओ, घर में बेबी पोस्टर होना चाहिए, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाओ… प्रेरणा को लगने लगा था कि जैसे सभी ने प्यार से उसकी हर चाह को पूरा कर दिया है |

पैरो की सूजन, शरीर की अकड़न, थकान या असहजता सब कुछ आसान लग रही थी.. उसे लगने लगा जैसे खुशकिस्मती की हर लकीर उसके हाथों में है, उसका वो ख़्वाब पूरा होने जा रहा था जो हमेशा से उसकी आँखों में था | जब प्रेरणा की शादी हुई तो वो अपनी भतीजी को एक माँ की तरह ही संभालती थी | ऑफिस से आती, भाभी और मम्मी कहते तू बस इसे सुला दे, हम खाना बनाते है | प्रेरणा के अंदर वो माँ की भावना हमेशा से ही थी और अब तो अपने बच्चे से मिलने का समय पास आ रहा था |

गोद भराई हुई, सभी ने उसको आशीर्वाद दिया, शुबकामनाएं दी |

बच्चा कैसा भी हो, बस भाई जैसे नकचढ़ा ना हो – उसकी प्यारी सी नन्द ने प्रेरणा के कानों में फुसफुसाते हुए कहा | प्रेरणा और नन्द ठाहके मार-मार हॅसने लगी | हर बीतता दिन पूरे घर को आशा की किरण की ओर ले जा रहा था |

डॉक्टर ने कहा है आजकल में गुड न्यूज़ आ सकती है | मुझे तो बड़ी टेंशन हो रही है | टाइम से पहुंच जायेंगे ना हम -विनय के माथे पर तनाव की लकीरे साफ़ दिखाई दे रही थी | डोंट वरि, एवरीथिंग विल बी ऑलराइट |  

हर चीज़ प्लान हो गयी लेकिन ज़िंदगी बड़ी टेढ़ी है, जैसा प्लान करो वैसा होता नहीं | एक दिन अचानक सुबह से शाम हो गयी लेकिन प्रेरणा को मूवमेंट फील नहीं हुई, सास ने कहा ग्लुकोन डी वाला पानी पी, अभी महसूस होगा | वो भी किया लेकिन कोई हरकत नहीं | प्रेरणा ओर विनय ने बिना देर कर डॉक्टर को दिखाया | कॉर्ड गले में फॅसने के कारण डॉक्टर प्रेरणा के बच्चे को बचा ना सकी |

नार्मल डिलीवरी हुई लेकिन हाथ में पार्थिव शरीर आया | प्रेरणा खूब रोई – ये तो ना बोलता है, ना रोता है, क्या भूख भी नहीं लगती इसको? वो ख़ुशी की वर्षा की उम्मीद कब मायूसी के काले बादलों में बदल गयी, पता नहीं चला |

समय बीता, जख्म भी धीरे-धीरे भरने लगे, प्रेरणा ने ज़िन्दगी को फिर से गले लगाया और अपनी सास के ट्रंक में रखे बच्चे के स्वेटर को फिर से बैग में पैक करने लगी और गुनगुनाने लगी..नन्ही परी सोने चली, हवा धीरे आना. –

वो फिर एक बार माँ बनी |

 

चित्र स्त्रोत -bluebells and buttercups,babycentre,youtube,pinterest

 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *