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कैसे बनाएँ पीरियड्स के कठिन दिनों को आसान – रुजुता दिवेकर

Kavita Uprety | अक्टूबर 9, 2018

कैसे बनाएँ पीरियड्स के कठिन दिनों को आसान – रुजुता दिवेकर

अक्सर हमने बात की है महिलाओं के उन कठिन दिनों की जो उन्हें हर महीने सहन करने ही पड़ते हैं। पीरियड्स के दिनों में उम्र के हिसाब से अलग अलग तरह की समस्याएँ परेशान करती हैं। मैंने कई बार देखा है जब युवा बेटी माँ से अपनी परेशानी के बारे में बताती है तो माँ का जवाब होता है “मुझे भी ऐसा ही होता था बेटा” और जो कुछ उपाय वो अपने लिए आजमाती थी वही बेटी को भी बता दिये जाते हैं। जहां युवा लडकियाँ अक्सर चेहरे पर मुहाँसे, पेट में दर्द या क्रैम्प्स और अधिक रक्त आने की समस्या से परेशान रहती हैं वहीं चालीस के ऊपर की महिलाएं अनियमित माहवारी और यहाँ तक की पीसीओडी जैसी गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं जो और कई अन्य शारीरिक अनियमितताओं को जन्म देती है। विश्व प्रसिद्ध डाइटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने पीरियड्स की इन समस्याओं के समाधान के लिए दिये हैं आहार संबंधी कुछ आसान टिप्स। आइये जानते हैं क्या कहना है रुजुता का-

वो कहती हैं अच्छा स्वास्थ्य इंचेज़ मेजरमेंट का मोहताज नहीं होता यानि कि शरीर कितना मोटा हुआ या कितना पतला है ये महत्वपूर्ण नहीं है। ज़रूरी ये है कि आप स्वस्थ रहें और इसे जानने के तीन तरीके हैं।

  • पहला – आप दिनभर कितना स्फूर्तिवान महसूस करते हैं?
  • दूसरा – आप रात में कितनी गहरी नींद सोते हैं?
  • तीसरा – आप नियमित व्यायाम करते हैं या नहीं?

इन तीनों कसौटियों पर खरा उतरने के बाद भी अगर आपको पीरियड्स के दिनों में परेशानी होती है खास तौर पर अनियमित मासिक और पेट में एँठन तो उसके लिए रुजुता आपको कुछ विशेष चीजों का सेवन करने की सलाह देती हैं जो इंसुलिन के प्रति आपके शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं और मासिक की अनियमितता को दूर करने में मदद करते हैं।

सभी उम्र की महिलाओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए रुजुता ने बताया कि नारियल, गुड और जलकुंभी के बीज़ (वॉटरक्रेस सीड्स) वो चीज़ें हैं जो पीरियड्स के दौरान चेहरे की तैलीयता और खुले हुए रोमछिद्रों की समस्या में मदद करते हैं।

साथ ही कच्चा केला, जिमिकन्द और अंकुरित की हुई दालें या फलियाँ पीएमएस को रोकती हैं और लंबे समय तक होने वाली स्पौटिंग (थोड़ा थोड़ा रिसाव) को नहीं होने देती। साथ ही इस दौरान बढ़ जाने वाले माइग्रेन को भी कम करती हैं।

नचनी या रागी जैसा बेहतरीन अनाज पीरियड्स के दौरान पेट में होने वाली एँठन और चेहरे पर निकलने वाले अनचाहे मुहांसों को दूर रखने में विशेष लाभकारी है। फिर चाहे आप इसे डोसा बना कर खाएं, दलिया या फिर भाकरी के रूप में।

क्या ये आसान सी बात नहीं कि हम अपनी किचन में उपलब्ध इन चीजों का इस्तेमाल करें और स्वस्थ रहें? भारतीय भोजन परंपरा हमेशा से इस तरह से बनाई गयी है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहे बिना किसी दवा या इलाज़ के। अपनी जड़ों को टटोलेंगे तो अधिकतर समाधान घर के अंदर से ही निकल आएंगे। ज़रूरत है बस इस बात को समझने की और अपनी अगली पीढ़ी को भी इस बारे में जागरूक करने की।

 

चित्र श्रोत: www.pixabay.com, www.wikipedia.org,  flicker, huffpost, rebanas.com, pxhere