डेंगू से कैसे बचें – रुजुता दिवेकर

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बरसात के शुरू होते ही कई तरह की बीमारियों और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है जिसमें मच्छरों के काटने से होने वाला रोग डेंगू बहुत खतरनाक है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है। बरसात के मौसम में जब पानी गमलों इत्यादि में एकत्रित हो जाता है तो इसमें एडीज़ मच्‍छर पनपते हैं जिनके काटने से डेंगू रोग होता है। डेंगू के तेज़ वायरल इन्फेक्शन में शरीर की सामान्य क्लॉटिंग (खून में थक्का जमने) की प्रक्रिया गड़बड़ा जाती है। रक्त में प्‍लेटलेट्स की संख्‍या कम होने के साथ साथ डेंगू होने पर कई बार शरीर में ब्‍लीडिंग होने के कारण यह जानलेवा भी हो जाता है। इस बीमारी का सबसे अच्छा इलाज़ इससे बचाव करना ही है। इसी के बारे में जानी मानी न्यूत्रीशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने दिये हैं कुछ बेहतरीन सुझाव-

रुजुता कहती हैं कि कुछ ऐसी चीज़ें हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ अद्भुत चिकित्सकीय गुण रखती हैं और अगर इनका नियमित सेवन किया जाए तो किसी भी इनफेक्शन के खतरे से बचा जा सकता है और अगर आप डेंगू जैसे रोग के शिकार हो भी गए हैं तो बहुत जल्दी सेहत में सुधार लाया जा सकता है।

 

1.गुलकंद –

इनमें सबसे पहली चीज़ है गुलकंद। या तो इसे सुबह उठकर खाली पेट खाएं या फिर खाने के साथ। ये ऐसिडिटी, नौज़िया और कमजोरी को दूर भागने का रामबाण इलाज़ है।

 

2.केसर हल्दी वाला गुणकारी दूध

एक गिलास दूध में एक गिलास पानी मिला कर एक चुटकी हल्दी और दो से तीन पंखुड़ियाँ केसर तथा थोड़ा सा जयफल मिला कर उबाल लें जब तक कि यह आधा न रह जाये। इसमें गुड मिला कर ठंडा या गरम पीयें जैसा भी आपको अच्छा लगे। यह प्रोटीन की कमी को पूरा करने के साथ साथ इमम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन को भी कम करता है।

 

3.चावल की कांझी –

 इसे आप चावल से बना सूप भी कह सकते हैं। इसमें काला या सेंधा नमक और थोड़ी सी हींग तथा घी मिला कर पियें। रुजुता कहती हैं हींग शुद्ध क्वालिटी की इस्तेमाल करें जैसी कि आमतौर पर केरल में मिला करती है। इस कांझी के नियमित प्रयोग से भूख बढ़ती है, डीहाइड्रेशन से राहत मिलती है तथा इलेक्ट्रोलाइट्स इम्बैलेंस की स्थिति में बहुत लाभ मिलता है।

 

4.खूब सारा पानी-

दिन भर छोटे छोटे घूंट भरते हुए पानी पीते रहें ताकि खुल कर यूरिन पास होती रहे। जब यूरिन का रंग साफ या बेरंग आने लगे तो यह बेहतर होने की निशानी है।

रुजुता कहती हैं आहार के साथ साथ एक आसान सा योगाभ्यास आप को अद्भुत लाभ दे सकता है और यह है सुप्त बाधाकोणासन।

 

5.सुप्त बाधाकोणासन –

अइयंगर पद्धति से अनुसार अभ्यास किये जाने वाले इस आसन के लिए दो चीजों की ज़रूरत होती है। एक आराम तकिया या ब्लौस्टर जिससे पीठ को आराम से टिकाया जा सके और एक कंबल जिसे सिर के नीचे लगा कर गरदन को आराम दिया जा सके। पूरे शरीर और खास तौर से पीठ के दर्द में आराम के लिए शरीर के ऊपरी भाग को आरामदायक स्थिति में रखें।

हम सब के लिए स्वास्थ्य ही सबसे महत्वपूर्ण है और अन्य सभी बातें उसके बाद आती हैं। डेंगू जैसे किसी भी जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए इन उपायों को नियमित अपनाएं और अपनी इमम्यूनिटी को इतना स्ट्रॉंग बनाएँ कि कोई भी रोग आपके इस प्राकृतिक सुरक्षा कवच को तोड़ न पाये।

 

चित्र स्त्रोत: maxpixel , Flickr, pxhere,

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