कहीं आपको हाइपोथाईरोईडिज़्म तो नहीं?

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आजकल के दौर में थाइरौइड एक ऐसा रोग है जो अमूमन लोगों में पाया जाता है और कई बार तो बच्चे भी इससे पीड़ित होते हैं। इसका संबंध हमारे शरीर में मौजूद एक छोटी सी ग्रंथि से है जो गले के अगले हिस्से में होती है। ये ग्रंथि थाइरोक्सिन नामक हारमोन का उत्सर्जन करती है जोकि शरीर को सही तरीके से चलाने के लिए जरूरी है। इस ग्रंथि के सामान्य से अधिक काम करने या कम काम करने की अवस्था को एक तरह की विकृति माना जाता है और हाइपोथाईरोईडिज़्म इसी विकृति का नाम है। इस स्थिति में यह ग्रंथि थाइरोक्सिन हार्मोन का शरीर की जरूरत के मुताबिक उत्सर्जन नहीं कर पाती। इस असंतुलन से शरीर के मेटाबॉलिज्म और सामान्य विकास दोनों में बाधा पड़ती है क्यूंकि इस हार्मोन का मुख्य काम कैलोरीज और ऑक्सीजन को ऊर्जा में बदल कर शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने का है फलस्वरूप शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में कई तरह की गड़बड़ियाँ पैदा होने लगती हैं। यही गड़बड़ियाँ कुछ ऐसे शारीरिक लक्षण पैदा करती हैं जो इस रोग के शुरुवाती संकेत हैं। जैसे कि-

 

वजन का बढ़ना –

अचानक वजन का बढ़ना थायराइड हार्मोन के गिरते हुए स्तर का संकेत हो सकता है, यह हाइपोथाईरोईडिज़्म का सबसे पहला और सामान्यतः देखा जाने वाला प्रभाव है जो शरीर पर दिखाई देता है ।

 

ठंड के प्रति संवेदनशीलता-

ठंड महसूस करना या ठंड लगना भी हाइपोथाईरोईडिज़्म से जुड़ा हुआ है क्यूंकि थाइरौइड ग्रंथि हमारे शरीर के लिए थर्मोस्टेट की तरह काम करती है और गर्मी को नियंत्रित करने में मदद करती है और इसके अनियंत्रित स्राव के कारण शरीर को हल्की ठंड भी बर्दाश्त नहीं हो पाती।

 

त्वचा और बालों में सूखापन-

त्वचा का सूखापन हाइपोथाईरोईडिज़्म का लक्षण हो सकता है। इस स्थिति में बहुत कम मात्रा में थाइरौइड हार्मोन उत्पादन के कारण मेटाबोलिज़्म की क्रिया धीमी हो जाती है, जिसके कारण पसीने का उत्सर्जन कम हो सकता है। इस कारण पर्याप्त नमी के बिना त्वचा सूखी हो जाती है। सामान्य से कम कार्य करने वाली थाइरौइड ग्रंथि के कारण बालों का रूखा सूखा होना, पतला होना तथा टूटना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं ।

 

तनाव और अकारण मायूसी –

वैसे तो डिप्रेशन अपने आप में एक बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है पर चिकित्सकों द्वारा इसे हाइपोथाईरोईडिज़्म का भी एक लक्षण माना जाता है। इस रोग में चिकित्सक यह भी देखते हैं कि क्या व्यक्ति ज़्यादातर उदास या मायूस महसूस कर रहा है?  साथ ही थकान, आलस्य और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, अधिक नींद आना यह सब लक्षण भी व्यक्ति के थाइरौक्सिन के स्तर के घटने के कारण हो सकता है ।

 

मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द –

कुछ व्यक्तियों में हाइपोथाईरोईडिज़्म जोड़ों और मांसपेशियों की समस्याओं को जन्म दे सकता है । जैसे कि मांसपेशियों में दर्द, संवेदनशीलता और विशेष रूप से कंधे और कूल्हों में कठोरता, हाथों और पैरों के  छोटे जोड़ों की सूजन इत्यादि इस रोग के प्रारम्भिक संकेत हो सकते हैं।

 

गले में खिचाव और सूजन –

थायरॉइड नोड्यूल अगर काफी बड़े हो जायें तो सूजन का कारण भी बन सकते हैं । साथ ही साथ यह सांस लेने में कठिनाई और गले में दर्द भी पैदा कर सकते हैं। यह स्थिति अपेक्षाकृतकम पर कई व्यक्तियों में देखने को मिलती है।  

 

अनियमित माहवारी-

मासिक धर्म के दौरान ऐंठन के साथ अधिक रक्त आना और मासिक धर्म की अवधि का सामान्य से अधिक लंबे समय तक खिंचना भी हाइपोथाईरोईडिज़्म का संकेत हो सकता है। जब थायराइड हार्मोन का उत्सर्जन कम होता है तो दो मासिक धर्म के बीच का अंतराल भी सामान्य से घट सकता है ।

 

शारीरिक सम्बन्धों के प्रति उदासीनता –

कुछ व्यक्तियों में हाइपोथाईरोईडिज़्म होने पर शारीरिक सम्बन्धों के प्रति कम या बिलकुल ही इच्छा खत्म हो जाती है। चिकित्सक मानते हैं कि कई मामलों में बहुत कम थायराइड हार्मोन का उत्सर्जन ही व्यक्ति की कम कामेच्छा का कारण हो सकता है।

कहीं आप को भी तो इनमें से कोई परेशानी नहीं है? अगर है, और आप अभी तक अनदेखा कर रहे हैं तो तुरंत अपने चिकित्सक की सलाह लें।

 

चित्र श्रोत: www.wikimedia.org, www.wikipedia.org, www. Public Domain Pictures.net www.flickr.com,www.pexels.com www.pixabay.com www.aljamila.com  www.minsvyaz.ru

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