Home / Uncategorized / गहरी नींद के लिए करें ये योग आसन
गहरी नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क के सही तरीके से काम करने के लिए बहुत ज़रूरी है। यह हमारे तन मन को स्वस्थ रखती है तथा गहरी नींद के दौरान ही हमारे शरीर की मांसपेशियों के विकास और शरीर की मरम्मत का काम होता है जो हमारे शरीर को मज़बूत बनानेवाली प्रक्रियाएं हैं। यदि लंबे समय तक अच्छी और गहरी नींद न आए तो इससे हृदय रोग, तनाव, चिंता और थकान जैसी परेशानियाँ बढ्ने लगती हैं। पर भागदौड़ भरी इस ज़िंदगी में कई लोगों के लिए गहरी रिलैक्सिंग नींद पाना कई बार एक चुनौती बन जाता है। आप सबके लिए जिन्हें नींद न आने की समस्या ने परेशान कर रखा है हम कुछ ऐसे योग आसन लेकर आए हैं जो आपके शरीर और मस्तिष्क को शांत करके गहरी नींद लाने की अच्छी क्षमता रखते हैं-
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अपने घुटने मोड़कर एड़ियों पर आरामदायक स्थिति में बैठ जायें। अब सांस अंदर लेते हुए अपने दोनों घुटनों के ऊपर से आगे की ओर झुकें और सिर को दोनों पैरों के बीच रखते हुए धीरे धीरे सांस छोड़ दें। पेल्विस के पिछले हिस्से से टेलबोन को विपरीत दिशा की तरफ खींचें। सिर को हल्का उठाएं जब तक आप पीठ और गर्दन पर खिंचाव महसूस न करें। बांहों को सामने की ओर फैला लें। इस मुद्रा में यह आवश्यक है कि आपकी कुहनियां और घुटने एक सीध में हों। अधिकतम तीस सेकेंड्स तक इसी मुद्रा में स्थिर रहें।
सीधे खड़े हो कर अपने पैरों को फैला लें और हाथों को कमर पर रखें। सांस छोड़ें और सामने की ओर झुकें। इस प्रक्रिया में आवश्यक यह है कि आपका सिर और पूरा शरीर एक सीध में हो। अब थोड़ा और आगे झुकें और अपनी हथेलियों को ज़मीन पर टिका दें। इस पूरी प्रक्रिया में आगे झुकते वक़्त घुटनों को न मोड़ें। अधिकतम तीस सेकेंड तक इसी स्थिति में बने रहें और फिर धीरे धीरे सीधे खड़े हो जाएं।
इस आसन के लिए दीवार की ओर चेहरा कर के बैठ जायें। फिर पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को ऊपर की ओर हवा में तब तक उठाएं और धीरे धीरे आगे खिसकें जब तक कि आपके पैर दीवार से मिल न जायें। तलवे ऊपर की ओर रखते हुए नब्बे डिग्री के कोण में स्थित हो जायें। सहज हो जाने पर अपने कूल्हों को उठाकर उसके नीचे एक कुशन रख लें। इसी मुद्रा में अधिकतम पांच मिनट तक बने रहें।
शवासन मस्तिष्क के लिए बेहतरीन परिणाम लाता है। इस आसन को करने के लिए एक शांत स्थान का चयन करें और किसी कोमल दरी या योगा मैट पर पीठ के बल लेट जायें। अब दोनों पैरों को फैलाएं और रिलैक्स हो जायें। इसी प्रकार दोनों हाथों को भी ज़मीन पर फैला लें और हथेलियों को छत की ओर रखें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें और आंखें बंद रखते हुए अपनी साँसों पर ध्यान केंद्रित करें। फेफड़ों से गहरी सांस लेते हुए यह प्रक्रिया तब तक करते रहें जब तक कि आप शांत और सहज महसूस न करने लगें।
इस आसान में शरीर सेतु यानि कि पुल की तरह हो जाता है इसलिए इसे सेतुबंधासन कहा जाता है। इसको करने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जायें। घुटनो को मोड़ लें और दोनों पैरों को एक सीध में रखते हुए एक दूसरे से दस से बारह इंच की दूरी पर फैला लें। अब अपने हाथों से पैरों के टखनों को पकड़ लें और पीठ, कूल्हे और जांघों के साथ छत की तरफ उठने का प्रयास करें। ध्यान दें कि कमर को ज्यादा से ज्यादा ऊपर उठायेंगे और सिर व कंधे जमीन पर ही बने रहेंगे। इस स्थिति में आपकी ठुड्डी छाती से टच करनी चाहिये। अब अपनी सांस की गति सामान्य रखें और कुछ देर के लिए इस मुद्रा में बने रहें। वापस आने के लिए पहले आराम से अपनी पीठ को जमीन पर लाएं, फिर धड़ का ऊपरी हिस्सा व आखिर में कमर जमीन पर ले आएं। एक बार में इस मुद्रा में तीस सेकेंड से एक मिनट तक रहें और कई बार इस मुद्रा का अभ्यास करें।
इन योगासनों को पहली बार किसी भी प्रशिक्षित व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही सीखें ताकि आप को किसी भी प्रकार की चोट इत्यादि लगने की संभावना न रहे।
चित्र स्त्रोत: Wikimedia Commons, pixart, Public Domain Pictures flicker, maxpixel , pexels, healthydaes.com
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