डायबटीज़ रोगियों के लिए ख़ास -इन्सुलिन के काल्पनिक तथ्य और सच्चाइयां

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अगर आप डायबटीज़ से रूबरू हैं तो आपको इन्सुलिन की जानकारी अवश्य होगी | जब हमारे शरीर में इन्सुलिन हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है तो नार्मल ग्लूकोस स्तर को बनाये रखने के लिए हमें इसका सहारा लेना पड़ता है | आप में से ऐसे कितने लोग हैं जो इन्सुलिन थेरेपी का नाम सुनकर ही भाग जाते हैं? ऐसा इसीलिए है क्योंकि आप कुछ काल्पनिक तथ्यों को सच मान चुके हैं और सच्चाई से दूर हैं! चलिए जानते हैं कौन सी हैं वो बातें जिन्हे आप आज तक सच मान रहे थे ?

 

1.इन्सुलिन से वजन बढ़ता है

ये सही है कि जो लोग इन्सुलिन का प्रयोग करते हैं उनका वजन बढ़ता है | ऐसा क्यों ? ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि इन्सुलिन हमारे शरीर को भोजन पचाने में सहायता करता है जो कि बहुत अच्छी बात है और अगर आप इसके अनुसार अपनी खान-पान की आदतों को नहीं बदलते तभी आपका वजन बढ़ता है | इससे सम्बंधित किसी भी प्रकार का भ्र्म हो तो डॉक्टर की सलाह लें |

 

2.इन्सुलिन सबसे आखिरी इलाज है

ये मानना बिल्कुल गलत है कि केवल गंभीर रूप से प्रभावित रोगियों के लिए ही इन्सुलिन इलाज है | बल्कि लोगो की अनिच्छा की वजह से ही इसे आखिरी विकल्प समझा जाने लगा है | इन्सुलिन के शरीर पर इतने सारे फायदे देखते हुए आजकल डॉक्टर डायबटीज़ के शुरुवाती दौर में ही इसे लेने की सलाह देते हैं |

 

3.इन्सुलिन से होती है आँखे और किडनी खराब

ये सभी गंभीर अवस्थाएँ डायबटीज़ की देन हो सकती हैं, इन्सुलिन की नहीं | बल्कि डॉक्टर्स की माने तो ये सभी गंभीर अवस्थाओं पर इन्सुलिन का प्रयोग करने से रोक लग सकती है |

 

4.इन्सुलिन लेना मतलब बिमारी से हार मान लेना

अगर आपको डॉक्टर इन्सुलिन थेरेपी की सलाह देता है तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप डायबटीज़ से डट कर लड़ नहीं पाएं | डायबटीज़ एक जैसे नहीं रहता और जब भी ये बढ़ता है तो इसे काबू में लाने के लिए इन्सुलिन जैसी असरदार थेरेपी की जरुरत होती है |

 

5.इन्सुलिन काम नहीं करती

ये वो लोग मानते हैं जो सही समय और सही मात्रा पर ध्यान नहीं देते | इन्सुलिन ब्लड ग्लूकोस स्तर को कम करने में सबसे ज्यादा असरदार है | कितना और कब लेना है ये व्यक्ति की स्तिथि पर निर्भर करता है |

 

6.इन्सुलिन इंजेक्शन बहुत दर्दनीय होते हैं

इन्सुलिन इंजेक्शन दिन में कई बार लगाना किसी को भी रास नहीं आता | लेकिन इंजेक्शन की सुई इतनी पतली होती है कि दर्द ऊँगली में सुई चुभने जैसा होता है | यहाँ तक कि आजकल ऐसे इंजेक्शन भी आ गए जिससे दर्द ना के बराबर होता है |

 

7.इन्सुलिन बहुत बड़ा ताम-झाम है

शुरुवात में इन्सुलिन कैसे लेना है, कितनी मात्रा में लेना हैं यहाँ तक कि इंजेक्शन को देखते ही कुछ होता है लेकिन कुछ ही हफ्तों में आपको पूरे तौर-तरीके समझ आ जाते हैं बल्कि कुछ समय बाद आपको इन्सुलिन इंजेक्शन लेना अपनी दिनचर्या का हिस्सा लगने लगता है |

 

8.प्रेगनेंसी में इन्सुलिन का प्रयोग बच्चे के लिए खतरा

इन्सुलिन बच्चे को किसी भी तरह का नुक्सान नहीं पहुंचाता बल्कि हमेशा बढ़ा हुआ ग्लूकोस स्तर प्रेगनेंसी में मुश्किलें बढ़ा सकता हैं |

 

9.इन्सुलिन एक लत है

इन्सुलिन कोई चरस नहीं जो इसे लत कहा जाए | हमारे शरीर में इन्सुलिन जन्म से ही होता है लेकिन जब आपको डायबटीज़ होता है तो शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाती है तभी ये इलाज सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है |

 

10.इन्सुलिन थेरेपी आपको दूसरो पर निर्भर कर देगी

बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि एक बार इन्सुलिन थेरेपी शुरू कर दी तो आप कहीं आ जा नहीं सकते या फिर आपको किसी ना किसी पर निर्भर रहना पड़ेगा | बल्कि इसे अपनाने से आप आत्मनिर्भर हो जाएंगे और इन्सुलिन उपकरण आसानी से कही भी ले जाए जा सकते हैं |

 

चित्र स्त्रोत: army.mil, blausen, focus de, Harvard health, gestational diabetes

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