Home / Nutrition in Hindi (पोषण) / टाइप 2 डायबिटीज़ क्या होता है? जाने इसके लक्षण, उपचार और आहार के बारें में
आप अपने आस-पास बहुत से डायबिटीज़ रोगियों से मिले होंगे, या कभी आपके घर आये मेहमानों ने मीठा न लेने का कारण बताते हुए कहा हो कि हम मीठा नहीं ले सकते हमें डायबिटीज़ है, या हम शुगर के पैशेंट हैं। यह बीमारी इतनी आम हो चुकी है कि अब हर घर में प्रत्येक व्यक्ति को इस बीमारी और इस बीमारी के लक्षणों के बारे में पूरी जानकारी होती है।
किसी भी बीमारी का हमारे शरीर में घर बना लेने का कारण आमतौर पर हमारे खराब खानपान और हमारे अस्वस्थ रहन-सहन को दिखाता है। अतः बीमारी के दौरान बरतने वाली सावधानियों से बेहतर है कि आप पहले ही अच्छे खानपान और एक स्वस्थ लाइफ स्टाइल को अपनाकर इसे पूरी तरह से रोक लें। डायबिटीज़ के दौरान उपयोग में लाये जाने वाले भोजन और स्वस्थ रूटीन से पहले एक नजर डालते हैं “क्या होता है टाइप 2 डायबिटीज़”, “और टाइप 2 डायबिटीज़ कितने प्रकार का होता है?” जैसे सवालों पर।
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डायबिटीज़ एक पुरानी दीर्घकालिक(लंबे समय तक होने वाली) स्वास्थ्य स्थिति है, जो कि आपके शरीर के द्वारा भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली क्रिया को प्रभावित करती है। आपके द्वारा खाया जाने वाला अधिकांश भोजन चीनी में टूट जाता है (जिसे ग्लूकोज़ भी कहा जाता है) और आपके रक्तप्रवाह (Blood Flow) में छोड़ दिया जाता है।
जब आपका ब्लड शुगर बढ़ जाता है, तो यह आपके अग्न्याशय (Pancreas) को इंसुलिन छोड़ने का संकेत देता है। ऊर्जा के रूप में उपयोग करने के लिए इंसुलिन आपके शरीर की कोशिकाओं (cells) में ब्लड शुगर को जाने देने के लिए एक कुंजी की तरह काम करता है।
यदि आपको डायबिटीज़ है, तो आपका शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है, या वह जितना इंसुलिन बनाता है उसका उपयोग नहीं कर पाता है। जब पर्याप्त इंसुलिन नहीं होता है या कोशिकाएं इंसुलिन का जवाब देना बंद कर देती है, तो बहुत अधिक ब्लड शुगर आपके खून में रहता है। समय के साथ, यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे ह्दय रोग,कमजोर दृष्टी, और गुर्दे की बीमारी।
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डायबिटीज़ के तीन मुख्य प्रकार हैं – टाइप 1, टाइप 2 और गर्भकालीन।
टाइप 1 डायबिटीज़ (type 1 diabetes in hindi) किसी भी उम्र में विकसित हो सकता है, लेकिन यह बच्चों और किशोरों में सबसे अधिक देखने को मिलता है। जब आपको टाइप 1 डायबिटीज़ होता है, तो आपका शरीर बहुत कम इंसुलिन बनाता है, जिसका अर्थ है कि ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए आपको दैनिक इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।
टाइप 2 डायबिटीज़ (type 2 diabetes in hindi) युवाओं में अधिक आम है और सभी डायबिटीज़ के मामलों में लगभग 90% के लिए जिम्मेदार है। जब आपको टाइप 2 डायबिटीज़ होता है, तो आपका शरीर उस इंसुलिन का अच्छा उपयोग नहीं करता है जो यह पैदा करता है। टाइप 2 डायबिटीज़ के उपचार का आधार हेल्दी लाइफ स्टाइल है, जिसमें शारीरिक गतिविधि में वृद्धि और स्वस्थ आहार शामिल है। हालांकि, समय के साथ टाइप 2 डायबिटीज़ वाले अधिकांश लोगों को अपने ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए दवाइयों या इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होगी।
गर्भकालीन डायबिटीज़ (जीडीएम) (gestational diabetes) एक प्रकार का डायबिटीज़ है जिसमें गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड शुगर होता है और यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है। जीडीएम आमतौर पर गर्भावस्था के बाद गायब हो जाता है लेकिन इससे प्रभावित महिलाओं और उनके बच्चों को बाद में टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है।
डायबिटीज़ का अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन वजन कम करना, स्वस्थ भोजन करना और सक्रिय रहना वास्तव में मदद कर सकता है। आवश्यकतानुसार दवा लेना, डायबिटीज़ से जुड़ी शिक्षा और सहायता प्राप्त करना, और स्वास्थ्य देखभाल की जानकारी रखना भी आपके जीवन पर डायबिटीज़ के प्रभाव को कम कर सकता है।
अपने बल्ड ग्लूकोज़ लेवल को सुरक्षित स्तर तक पहुंचाने के लिए नियमित रूप से अपने डॉक्टर के संपर्क में बने रहें, तथा डॉक्टर के द्वारा बताये गये इंस्ट्रक्शन को नियमित रूप से पालन कर भी आप अपने डायबिटीज़ में सुधार ला सकते हैं। क्योंकि डायबिटीज़ का अभी तक कोई स्थाई इलाज नहीं मिल पाया है, इसलिए इलाज का तरीका चाहे जो भी हो फिर भी आपको टाईप-2 डायबिटीज़ के साथ जीना आना चाहिए।
टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ दोनों में, ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक हो सकता है क्योंकि शरीर इंसुलिन (एक हार्मोन जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है) का उत्पादन नहीं करता है – या यह इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं करता है। हालांकि समस्या दोनों प्रकारों में समान है, लेकिन उनके अलग-अलग कारण और उपचार हैं। दो प्रकार के डायबिटीज़ के बीच मुख्य अंतर यह है कि टाइप 1 मधुमेह अनुवांशिक है जो अक्सर जीवन में छोटी उम्र में दिखाई देता है, और टाइप 2 काफी हद तक आहार से संबंधित होता है और समय के साथ विकसित होता है।
यदि आपको टाइप 1 डायबिटीज़ है, तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपके अग्न्याशय (Pancreas) में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर रही है। (अग्न्याशय एक चपटा अंग है जो एक लंबी, बग़ल में अल्पविराम की तरह दिखता है और आपके पेट के पीछे लटकता है)। अच्छी खबर यह है कि आज के उपचार टाइप-1 डायबिटीज़ वाले लोगों को डिसऑर्डर के प्रभावों को मैनेज करना सिखाते हैं।
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आपका आहार आपके डायबिटीज़ में एक भूमिका निभाता है, इसका कारण यह है कि आप जो भी खाना अपने रोजमर्रा के जीवन में खाते हैं उसका सीधा असर आपके ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। उदाहरण के लिए उच्च कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देता है, पाचन तंत्र पचाने योग्य को चीनी में तोड़ देता है जो रक्त में प्रवेश करता है।
लेकिन फिर यह कहना भी गलत होगा सभी कार्बोहाइड्रेट खराब होते हैं। साबुत अनाज जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट को पचने में अधिक समय लगता है, जबकि सफेद आटा और परिष्कृत शर्करा (refined sugars) जैसी साधारण कार्बोहाइड्रेट आपके ब्लड शुगर लेवल में अचानक वृद्धि कर सकती है।
भारतीय खाद्य पदार्थ इतिहास में गहराई से निहित हैं और संभवत: मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक हैं और अपने भूगोल की तरह ही पारंपरिक भारतीय भोजन भी बेहद विविध हैं। भारतीय आहार में कई स्थिर खाद्य पदार्थ, प्रजातियां और सब्जियां डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों के लिए बहुत अच्छी मानी गई है।
इस लेख में हम कुछ ऐसे पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों पर चर्चा करेंगे जो वैज्ञानिक रूप से डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य लाभ साबित हुए हैं।
स्वीडन में यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि जौ में पाए जाने वाले विशेष मिश्रण आहार फाइबर खाने से आपकी भूख और साथ ही हाई ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और ज्वार और रागी घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के होते हैं जो शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
करेले में पॉलीपेप्टाइड p या p इंसुलिन नामक इंसुलिन जैसा योगिक होता है, जो स्वाभाविक रूप से डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के जर्नल में जारी एक रिपोर्ट इस बात का सबूत देती है कि कड़वा करेला खाने से कोशिकाओं में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है, और ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार करता है।
यह उच्च रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक पारंपरिक उपाय है, इसमें खनिज क्रोमियम भी होता है जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय (metabolism) को पुनर्व्यवस्थित करता है और आपके शरीर को इंसुलिन के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील बनाने में मदद करता है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ विटामिन न्यूट्रिशन रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि गर्म पानी में भिगोई हुई 10 ग्राम मेथी के बीज़ की हमारी दैनिक खुराक टाइप 2 डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए मदद करती है। मेथी के पानी में डायबिटीज़ वाले लोगो में ब्लड शुगर को कम करने की क्षमता होती है। इसमें फाइबर होता है जो पाचन प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है, और कार्बोहाइड्रेट और चीनी के अवशोषण को नियंत्रित करता है। मेथी का पानी आपके शरीर द्वारा चीनी का उपयोग करने के तरीके को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।
बीन्स में फाइबर पोषक तत्वों और प्रोटीन की एक स्वस्थ खुराक होती है, जो हमें लंबे समय तक भरा रखती है। और हमारे कार्बोहाइड्रेट सेवन को कम करती है और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स बल्ड शुगर के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करता है। बीन्स वन्सपति प्रोटीन का एक उत्तम स्त्रोत है और डायबिटीज़ के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है। कम ग्लाइसेमिक आहार के साथ प्रतिदिन एक कप बीन्स या मसूर को टाइप 2 डायबिटीज़ के रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर और कोरोनरी धमनी जोखिम रोग को कम करने के लिए उपयुक्त दिखाया गया है।
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आधा कप सफेद मसूर और 1 चम्मच मैथी के बीज को अच्छे से धोकर साफ करलें। और दो घंटे पानी में भिगोकर छोड़ दें। साथ ही ¼ कप पोहे को 5 मिनट के लिए पानी में भिगायेंं और दोनो का एक महीन पेस्ट तैयार करें। अब एक कप रागी का आटा डालें और थोड़ा पानी डालकर दुबारा अच्छे से पीस लें। अब इसे 8 से 10 घंटे के लिए छोड़ दे। अब इसमें स्वादानुसार नमक डालें और और आपका डोसा बैटर तैयार है।
चटनी के लिए 1 कप कसा हुआ नारियल, ¼ कप भुनी हुई चना दाल, अदरक , हरि मिर्च और नमक डालकर पीस लें। अब एक अलग बरतन में 1 चम्मच तेल , आधा चम्मच सरसो के बीज, उड़द दाल और करि पत्ता का तड़का लगाकर चटनी में डाल दें । आपकी चटनी तैयार है।
कुल्थी की दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है, इसे दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण फसल माना गया है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और देखने में मसूर की दाल की तरह लगती है। कुल्थी की दाल की इडली बनाने के लिए कुल्थी की दाल और 2 कप डोसा के चांवल को अच्छे से धोकर 5 से 6 घंटे के लिए भीगने छोड़ दें। अब इन्हें महीन पीसकर 10 घंटे के लिए ढ़ककर छोड़ दें।अब इसमें स्वादानुसार नमक मिला लें, और आपका इडली का बैटर तैयार है। इडली के बरतन पर थोड़ा तेल का प्रयोग करना न भूलें और नारियल की चटनी के साथ गरमा-गरम इडली का आंनद लें।
1 कप दलिया को मीडियम आंच पर लगभग 3 मिनट तक अच्छे से भूनें, अब एक अलग बरतन में 2 चम्मच तेल गर्म करें, उसमें आधा चम्मच सरसों , मसूर और कड़ी पत्ता का तड़का लगायें। अब प्याज, हरि मिर्च और अदरक को कसकर डालकर अच्छे से पकाएं। अब उसमें आधा कप कटा हुआ गाजर, कटी हुई फली और 1 कप मटर डालकर पकाएं, अब आधा चम्मच हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर चलाएं। सब्जियों और मसालों के अच्छे से पक जाने पर 2.5 कप पानी डालकर उसे अच्छे से उबलने दें। अब इसमें भुना हुआ दलिया मिलाकर ढककर 3 मिनट के लिए पकने के लिए छोड़ दें। और आपका दलिया उपमा तैयार है।
लंबी फलियों को किनारों से छील लें, इन्हें अच्छे से धोकर छोटे-छोटे टुकड़ो में काट लें। अब एक बरतन में दो चम्मच नारियल तेल डालें, आधा चम्मच सरसों के बीज, उड़द दाल, एक लाल मिर्च और करी पत्ता का तड़का लगाएं। अब कटी फलियों को डाले और कुछ देर तक पकाएं। अब इसमें आधा चम्मच हल्दी और स्वादानुसार नमक डालें, अब 1 कप पानी डालें और ढक्कन रखकर पकने छोड़ दें। आधा पक जाने पर 1 चम्मच इमली का रस, एक छोटा टुकड़ा गुड़, और आधा नारियल को कसकर और मिर्ची और जीरा के साथ पीसकर मिला लें। इसे अच्छी तरह मिला लें और आपका फली का पाल्या तैयार है।
3 चम्मच तेल में सरसों और कड़ी पत्ता का तड़का लगाएं, अब आधा चम्मच कटी हुई हरी मिर्च, हल्दी और हींग डालें। अब इसमे कटे हुए मीठा कद्दू मिलायें। अब इसमें थोड़े पानी के साथ स्वादानुसार नमक डालें और पकने के लिए छोड़ दें। अब इसमें कसे हुये नारियल कटा हुआ धनिया और नींबू डालकर अच्छे से मिलायें। आपका मीठा कद्दू पाल्या तैयार है। जिसपर आप उपर से कसा हुआ नारियल और धनिया डालकर इसे फिनिशिंग टच दे सकते हैं।
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स्वाद और सेहत दोनों का ही हमारे जीवन में एक खास महत्व होता है। और डायबिटीज में दोनों का ही ख्याल रख पाना एक कठिन काम हो जाता है। लेकिन हमारे टाइप 2 डायबिटीज ब्लॉग के साथ अब आपको स्वाद और सेहत दोनों के ही साथ कॉम्प्रोमाइज नहीं करना पड़ेगा। हम आपके लिए लेकर आये हैं, स्वादिष्ट और सेहत से भरपूर रेसिपीज जिन्हें आप मधुमेह के दौरान खा सकते हैं। सेहत और सैहत से भरपूर इस बॉग पर आप अपनी राय हमें नीचे कमेंट सेक्शन में दे सकते हैं। कैसा लगा आपको हमारा ये बॉग हमें बतायें,और शेयर करे अपने दोस्तों और परिवार के साथ। खाने से जुडी और भी लेटेस्ट न्यूज और नई रेसिपीज के लिए जुडे रहिये BetterButter के साथ।
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Apke likhne ka andaz bohot achcha hai isse bohot seekhnen ko mila thanks
thank u soo much