Home / Top Cooking Recipes in Hindi / क्या आप जानते हैँ जिन 10 व्यंजनों को आप भारतीय समझ कर चाव से खाते हें वह असल में विदेशी हैं
भारत खाने में अपने जायके और मिठास दोनों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर हमारे यहाँ भाषा और खाने का स्वाद बदलता रहता है। हर राज्य का अपना पसंदीदा क्षेत्रीय भोजन है और हर किसी का अपना स्वाद है। पर कुछ चीज़ें तो हमारे यहाँ इतनी लोकप्रिय हो चुकी हैं कि बाहर की होकर भी अपनी सी लगती हैं। जी हाँ, एकदम सही सोच रहे हैं आप। भारत में ऐसे बहुत से व्यंजन हैं जिनका जन्म तो किसी और देश में हुआ पर वे अब भारतीय थाली का अभिन्न अंग बन चुके हैं। इस आर्टिकल में हम पर्दा उठाएंगे कुछ ऐसे ही व्यंजनों से जो एकदम विदेशी होकर भी देसी लगते हैं। आइये जानते हैं विस्तार से।
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भारत में जितना स्वाद नमकीन व्यंजनों का लिया जाता है उतना ही लोग मीठे व्यंजनों को भी पसंद करते हैं। इसलिए जो विदेशी व्यंजनों की लिस्ट आपसे शेयर करने जा रहे हैं उसमें आपको यह दोनों चीजें ही देखने को मिल जाएंगी। तो आइए जानते हैं उन डिशेज़ के बारे में जो बन चुकी है अब हमारी भारतीय थाली का अभिन्न हिस्सा-:
गुलाब जामुन के बिना हमारा कोई भी त्यौहार और कोई भी शादी-पार्टी पूरी नहीं होती। निश्चित रूप से आप में से कई लोग ये जरूर मानते होंगे कि गुलाब जामुन एक भारतीय मिठाई है पर सच्चाई कुछ और ही है। दरअसल गुलाब जामुन एक पर्शियन डिश है और इसका मूल नाम भी पर्शियन ही है। पुराने समय में गुलाब जामुन को ‘इकमत-अल-कादी’ के नाम से जाना जाता था। उस समय गुलाब जामुन बनाने के लिए मावे की बॉल्स को शहद में डुबोया जाता था, पर समय के साथ उसका रूप बदलता गया। गुलाब जामुन बनाने की प्रचलित और टेस्टी रेसिपी आप यहाँ से देख सकते हैं।
समोसे का लुत्फ हर मौसम में हम सभी ने खूब उठाया है और जाहिर तौर पर हम सभी मानते आए होंगे कि समोसा एक बहुत ही चटपटा भारतीय फ़ूड है पर आज हम आपका यह मिथक तोड़ने वाले हैं। दरअसल जिस समोसे को अभी तक हम सभी एक इंडियन व्यंजन समझ रहे थे उसकी खोज मध्य पूर्व में 10वीं शताब्दी में की गई थी जहां इसे संबोसा कहा जाता था। इसके बाद यह संबोसा व्यापारियों के साथ साथ चौदहवीं शताब्दी में मध्य एशिया में आया और बन गया समोसा।
दाल भात को देखकर क्या कोई कह सकता है कि यह एक भारतीय खाना नहीं है? इसे खाने का अंदाज और इसे बनाने का अंदाज, सब कुछ इंडियन ही तो है, पर नहीं यह फिर भी एक भारतीय खाना नहीं है। डिटेल में बात करें तो दाल भात खाने की शुरुआत नेपाल से हुई और उसके बाद यह एक संस्कृति के रूप में पूरे हिंदुस्तान में फैल गया और आज हम इसे अपनी थाली से दूर नहीं रख सकते।
राजमा-चावल आपने जरूर खाया होगा और कई लोग तो यह भी मानते हैं कि ये एक पंजाबी खाना है, पर आपको शायद ये जानकर हैरानी होगी कि राजमा पंजाबी खाना तो दूर, एक इंडियन खाना भी नहीं है। मूल रूप से राजमा खाने की शुरुआत पुर्तगाल से हुई थी और उसके बाद मेक्सिको से हमें ये पता लगा कि इसे उबालकर और पकाकर खाया जा सकता है। हालांकि कटे हुए प्याज और मसालों से भरा राजमा बनाने का श्रेय जरूर सिर्फ भारतीय लोगों को जाता है।
अब चिकन टिक्का मसाला खाने की हमको इतनी आदत हो गई है कि कोई सोच भी नहीं सकता कि यह डिश विदेशी हो सकती है। पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वाद में पंजाबी लगने वाली चिकन टिक्का डिश की शुरुआत स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में हुई थी। यह व्यंजन ड्राई चिकन का एक बदला हुआ रूप है जिसे 1971 में सैफ अली अहमद द्वारा एक कस्टमर की रिक्वेस्ट पर बनाया गया था और उसके बाद यह डिश पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गई।
फिल्टर कॉफी यानी साउथ इंडिया की लोकप्रिय ड्रिंक कापही। सुनने में लग सकता है कि यह एक इंडियन ड्रिंक है, पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। फिल्टर कॉफी पीने की शुरुआत यमन से हुई जहां पर इसे एक सूफी संत बाबा बुदान ने मक्का की अपनी धार्मिक यात्रा में खोजा था। इसके बाद ये संत यमन के मोचा से अपने साथ सात कॉफी बीन्स लेकर आये और भारत को मिली अपनी फिल्टर कॉफी कापही।
विंदालू आज भारतीय आहार का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है, जिसे विभिन्न विशेष अवसरों पर बनाया जाता है। हालांकि जिसे अब तक आप एक इंडियन व्यंजन समझकर बना रहे थे, आपको बता दें कि असल में विंदालू एक पुर्तगाली व्यंजन है जो कि गोवा के औपनिवेशिक काल में भारत में आया। यह पुर्तगाली व्यंजन Carne De Vinha D’alhos‘ का एक बदला हुआ रूप है जिसे सुअर के माँस को लहसुन और वाइन में मैरिनेट करके बनाया जाता है।
इस लिस्ट में जलेबी का नाम देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे, क्योंकि हम सब की मनपसंद जलेबी आखिर विदेशी कैसे हो सकती है? पर सच तो यही है कि जलेबी की मूल रूप से शुरुआत मिडिल ईस्ट में हुई थी जहां इसे जलाबिया कहा जाता था। हालांकि हम भारतीयों ने इसका रबड़ी जलेबी और दूध जलेबी जैसा स्वरूप इजाद कर लिया है पर मूल रूप तो अभी मिडिल ईस्ट का ही है।
कितना भी ना, नहीं, नान कर लीजिए पर इस फैक्ट को आप बदल नहीं सकते कि हम सबकी मनपसंद तंदूरी नान भी विदेशी है। ये भारत को पर्शिया की देन है जो औपनिवेशिक काल के दौरान भारत आई। अब व्यंजन कहीं का भी हो जो पसंद आ गया उसे खाना कोई कैसे छोड़ सकता है?
इस लिस्ट में इतनी सारी चीजों को देखने के बाद तो आपने अंदाजा लगा ही लिया होगा कि आपकी मनपसंद बिरयानी भी हिंदुस्तानी नहीं है। भले ही नाम लखनऊ बिरयानी है पर यह डिश देन है पर्शिया की। वहाँ इसे बिरियन कहा जाता था जिसका मतलब होता है पकाने से पहले तलना, और इस तरह बन गई बिरयानी।
तो ये थे कुछ व्यंजन जो बाहर के होकर भी घर के लगते हैं। अब डिश की पैदाइश कहीं हो, जिसे हम पसंद आ गए, और जो हमें पसंद आ गया, वो हिंदुस्तानी ही हो जाता है। तो खाते रहिये, मौज उड़ाते रहिये, शेयर करते रहिए ये पोस्ट दोस्तों के साथ और जुड़े रहिये BetterButter के साथ।
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हिमांशु एक लेखक हैं और उन्हें खान-पान, आयुर्वेद, अध्यात्म एवं राजनीति से सम्बंधित विषयों पर लिखने का अनुभव है। इसके अलावा हिमांशु को घूमना, कविताएँ लिखना-पढ़ना और क्रिकेट देखना व खेलना पसंद है।
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