गिलोय एक प्रकार की बेल है जो आमतौर पर जगंलों और झाड़ियों में पाई जाती है। प्राचीन काल से ही गिलोय को एक आयुर्वेदिक औषधि के रुप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। गिलोय के फायदे को देखते हुए ही हाल के कुछ सालों से अब लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ी है और अब लोग गिलोय की बेल अपने घरों में लगाने लगे है। हालांकि अभी भी अधिकांश लोग गिलोय की पहचान ठीक से नहीं कर पाते है। साथ ही आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गिलोय की पहचान करना अब बहुत आसान है।
इसकी पत्तियों का आकार पान के पत्तों के जैसा होता है और इनका रंग गाढ़ा हरा होता है। आप गिलोय को सजावटी पौधे के रुप में भी अपने घरों में लगा सकते हैं। आज कल भले ही कई लोग इसके बारे में न जानते हों, लेकिन गिलोय जूस के फायदे अनेक है। साथ ही आपको गिलोय स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाव करते हैं, इसलिए आज हम बेटर-बटर के इस लेख में यहां गिलोय जूस के फायदे और गिलोय के जूस का सेवन कैसे करें व गिलोय का जूस कब लेना चाहिए के बारे में हम आपको पूरे विस्तार से बताने वाले है, तो आइये जानते है सबसे पहले गिलोय के जूस के फायदे के बारे में।
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गिलोय के जूस के फायदे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में काम आते हैं। तो आइए, जानते हैं गिलोय से होने वाले फायदे से जुड़ी विस्तृत जानकारी।
गिलोय को औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है। इसमें कई ऐसे रसायन होते हैं, जिनके कारण यह इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव प्रदर्शित करता है। यह प्रभाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता देता है। इन बीमारियों में मलेरिया और डेंगू जैसे वायरल इंफेक्शन भी शामिल हैं। इस कारण डेंगू की समस्या से राहत पाने में गिलोय के फायदे बताए जा सकते हैं।
गिलोय से फायदा गठिया की परेशानी में भी हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें, तो गिलोय के गुण में एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन को कम करने वाला प्रभाव होता है। साथ ही इसमें एंटी-अर्थराइटिक और एंटी-ऑस्टियोपोरोटिक यानी जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत दिलाने वाले प्रभाव भी होते हैं। ये तीनों प्रभाव संयुक्त रूप से गठिया की समस्या को दूर करने में सहायक माने जाते हैं।
गिलोय के जूस के फायदे पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने में देखे जा सकते हैं। जी हां, गिलोय के औषधीय गुण में से एक यह भी है कि इससे पाचन संबंधी कई समस्याओं जैसे कि डायरिया और दस्त से उबरने में मदद मिल सकती है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी गिलोय का उपयोग सहायक साबित हो सकता है। पाचन शक्ति को बढ़ाए रखने में सबसे अधिक गिलोय जूस के फायदे देखे जाते हैं।
गिलोय में ऐसे एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो पुराने से पुराने बुखार को भी ठीक कर देती है। इसी वजह से मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर रोगों में होने वाले बुखार से आराम दिलाने के लिए गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है।
बीमारियों को दूर करने के अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना भी गिलोय के फायदे में शामिल है। गिलोय सत्व या गिलोय जूस का नियमित सेवन शरीर की इम्युनिटी पॉवर को बढ़ता है जिससे सर्दी-जुकाम समेत कई तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।
गिलोय का जूस बहुत तेजी से वजन घटाती है। रोजाना थोड़ी मात्रा में गिलोय के जूस के सेवन से आप अपने शरीर में फैट बर्न की प्रक्रिया को तेज बना सकते हैं, जिससे आपका वजन तेजी से घटने लगता है। दरअसल गिलोय का जूस पीने से आपके शरीर का मेटबॉलिज्म तेज हो जाता है, जिसके कारण आपका शरीर सामान्य से कई गुना तेज फैट बर्न करने लगता है।
अस्थमा से परेशान महिलाओं को अपनी डाइट में गिलोय के जूस को शामिल करना चाहिए। अस्थमा एक पुरानी फेफड़ों की बीमारी है जो वायुमार्ग में सूजन के कारण होती है। अस्थमा, खांसी और नाक की एलर्जी जैसे कफ संबंधित विकारों के लिए गिलोय का जूस बहुत अच्छा होता है।
पीलिया के मरीजों को गिलोय के ताजे पत्तों का रस पिलाने से पीलिया जल्दी ठीक होता है। इसके अलावा गिलोय के सेवन से पीलिया में होने वाले बुखार और दर्द से भी आराम मिलता है। गिलोय स्वरस के अलावा आप पीलिया से निजात पाने के लिए गिलोय सत्व का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
बवासीर में गिलोय के लाभ देखे जा सकते हैं। एक अध्ययन में बताया गया है कि गिलोय का सेवन बवासीर से राहत दिला सकता है। दरअसल, धनवंतरी निघंटु में बताया गया है कि इसके औषधीय गुण खूनी बवासीर के इलाज में सहायक हो सकते हैं।
शरीर में खून की कमी यानि एनीमिया की समस्या। ऐसे में इससे बचाव के लिए गिलोय का जूस आपके बेहद काम आ सकता है। बता दें कि आयरन के अवशोषण बढ़ावा देने के साथ-साथ ये एमीमिया की समस्या से राहत भी दिला सकते हैं। इसके अलावा गिलोय ब्लड में रेड और सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ावा दे सकता है। इससे एनीमिया की समस्या से फायदे भी हो सकता है।
आज के समय में अधिकांश लोगों को गिलोय के फायदे (Giloy ke fayde) तो पता हैं लेकिन उन्हें गिलोय के जूस की सेवन विधि नहीं पता होती है और गिलोय का जूस कब लेना चाहिए इसके बारे में भी लोगों को पता नहीं होती है। हालांकि आप गिलोय का सेवन इन तीन रूपों में कर सकते हैं, गिलोय सत्व, गिलोय जूस या गिलोय स्वरस और गिलोय चूर्ण। साथ ही आजकल बाज़ार में गिलोय सत्व और गिलोय जूस आसानी से उपलब्ध हो जाता हैं। साथ ही गिलोय का जूस कब लेना चाहिए इसके बारे में आप अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लेकर ही गिलोय का सेवन कर सकते है।
गिलोय की लता लगभग 1 फीट तक लें, उसके उपर की परत को हटाकर उसकी लता को अच्छे से पीस लें, फिर इसको 6 ग्लास पानी, लौंग डाल कर अच्छे से खौला लें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छान कर आप इसका सेवन कर सकते है। साथ ही यह जूस जोड़े के दर्द में भी आराम देता है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी चीज का अधिक सेवन कुछ दुष्परिणाम प्रदर्शित करता है। उसी प्रकार अधिक मात्रा में सेवन से गिलोय के नुकसान भी हो सकते हैं।
प्रिय पाठकों अगर आपके मन में भी गिलोय के चिकित्सीय लाभ और क्या हम रोजाना गिलोय का जूस पी सकते हैं जैसे सवाल आपके मन में चल रहे है, तो आज ही ये सभी बातें अपने मन से निकाल दें। क्योंकि हमने आज गिलोय के जूस के फायदे वाले इस ब्लॉग में आपके सभी समस्याओं के समाधान के बारे में यहां पूरी जानकारी दे दी है।
साथ ही हमने ये भी बताने की कोशिश की है कि कैसे आप गिलोय के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits of Giloy) इस लेख के माध्यम से उठा सकते है, साथ ही आपके मन के सभी सवालों के जवाब भी दे दिया है, यदि आप और भी कोई जानकारी चाहते है तो हमें अपनी बात कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। साथ ही अगर ये लेख आपको पसंद आया है, तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ इसे जरूर साझा करें। ताकि उन्हें भी इस गिलोय के जूस के फायदे के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएं।
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