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PCOD Diet in Hindi: कैसा आहार बचाएगा आपको पीसीओडी से? जानिए पीसीओडी से बचाव का डाइट प्लान!

Himanshu Pareek | अप्रैल 24, 2023

लीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर यानी कि पीसीओडी कई महिलाओं के लिए परेशानी का कारण रहता है। पीसीओडी के कारण महिलाओं को माहवारी के दौरान तीव्र पीड़ा, मासिक धर्म का अनियमित आना, मुहांसे होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर पीसीओडी अधिक बढ़ जाए तो समस्या बांझपन तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पीसीओडी का मुख्य कारण शरीर में हॉर्मोनल अंसतुलन का होना होता है जिसे पौष्टिक डाइट लेकर और एक जीवनशैली अपनाकर नियंत्रित किया जा सकता है। इस आर्टिकल, PCOD Diet in Hindi में हम जानेंगे कि पीसीओडी होने पर कैसी डाइट लेना उचित रहता है, जिससे पीसीओडी में राहत मिल सके। साथ ही जानेंगे कि पीसीओडी होने पर किन चीजों से दूरी है ज़रूरी। तो आइये जानते हैं विस्तार से।

 

PCOD Diet in Hindi

PCOD क्या होता है? – What is PCOD in Hindi

पीसीओडी का मतलब होता है पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर। यह एक स्त्री रोग है जिसके होने पर महिलाओं के शरीर में शरीर में हार्मोन का असंतुलन स्थापित हो जाता है। पीसीओडी की समस्या होने पर महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन व टेस्टोस्टेरोन का स्राव अधिक होने लगता है। इससे महिलाओं के अंडाशय यानी ओवरी में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं।

पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं की ओवरी का आकार भी सामान्य ओवरी से बड़ा होता है। यह समस्या किशोरावस्था से लेकर वयस्क उम्र की महिलाओं में देखी जाती है। पीसीओडी होने पर सबसे अधिक समस्याएं महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित होती हैं, जिनमें मासिक धर्म का देर से आना (कभी-कभी तीन महीने के देरी से भी) मासिक धर्म के समय शरीर में तीव्र पीड़ा होना, रक्तस्राव असामान्य होना आदि प्रमुख है। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं की प्रजनन क्षमता भी कम हो जाती है।

PCOD के लक्षण – Symptoms of PCOD Problem in Hindi

पीसीओडी का मुख्य कारण महिलाओं के हॉर्मोन में असंतुलन का होना होता है। पीसीओडी एक स्त्री रोग है जो मुख्य रूप से 15 से 45 वर्ष की महिलाओं में होता है। पीसीओडी होने पर महिलाओं की प्रजनन क्षमता व माहवारी प्रक्रिया सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। पीसीओडी की पहचान निम्न लक्षणों से की जा सकती है:-

  • अचानक से वजन अधिक बढ़ना
  • बाल झड़ना
  • शरीर पर अनचाहे बालों का उगना
  • माहवारी का देर से होना 
  • माहवारी का अधिक जल्दी होना
  • माहवारी के समय अत्यधिक पीड़ा होना 
  • कील-मुंहासे एवं खुजली होना
  • हृदय संबंधित परेशानी होना

 

पीसीओडी में डाइट का महत्‍व- Importance of diet In PCOD In Hindi

पीसीओडी का संबंध हार्मोन से है। विशेषज्ञों के अनुसार पीसीओडी का मुख्य कारण तनावपूर्ण जीवन शैली, खान पान की अनियमितता व अधिक स्ट्रेस होता है। इसलिए बेहतर है कि इन सभी समस्याओं से बचने के लिए पौष्टिक एवं स्वच्छ आहार का सेवन किया जाए और स्वस्थ जीवन शैली अपनाई जाए।

महिलाएं विटामिन युक्त फलों, इंफ्लेमेटरी गुणों से युक्त खाद्य पदार्थों, व फाइबर रिच आहार का सेवन करके पीसीओडी में राहत पा सकती हैं। इससे महिलाओं का वजन नियंत्रित रहता है, शरीर में हार्मोनल संतुलन बना रहता है और गांठों में सूजन कम होने लगती है।

पीसीओडी/पीसीओएस में क्‍या खाएं और क्या नहीं? – What to Eat and What Not to Eat in PCOD/PCOS?

पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं के लिए आहार का विशेष महत्व है। उन्हें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो कि पोषण से भरपूर, औषधीय गुणों से युक्त और वजन घटाने में कारगर हो (Diet for PCOD Patients)। इसके अलावा महिलाओं को ऐसे भोजन से बचना चाहिए जिससे पीसीओडी की समस्या बढ़ सकती हो। आइए जानते हैं पीसीओडी में क्या खाएं और क्या नहीं?

पीसीओडी से राहत पाने के लिए महिलाओं को निम्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। शरीर को पोषण प्रदान करने के साथ-साथ ये डाइट मदद करेगी आपकी PCOS के दौरान वजन कम रखने में (PCOS Diet for Weight Loss in Hindi)। 

1. गुड फैट से भरपूर खाद्य पदार्थ:

पीसीओडी होने पर महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है। अधिक बढ़ा हुआ वजन पीसीओडी की समस्या को और बढ़ा सकता है। ऐसे में महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वे सैचुरेटेड और ट्रांस फैट लेने से बचें क्योंकि इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है। बेहतर है कि पीसीओडी होने पर असंतृप्त वसा जैसे वेजिटेबल ऑयल, कैनोला तेल, सूरजमुखी के तेल, सरसों के तेल, नारियल के तेल, अखरोट, बादाम आदि का सेवन किया जाए।

2. फाइबर युक्त आहार:

पीसीओडी के दौरान महिलाओं को वजन कम करने में उपाय तलाशने चाहिए। इसमें फाइबर युक्त आहार आपकी मदद कर सकता है। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को दिनभर में 20-25 ग्राम फ़ाइबर का सेवन करना चाहिए। शरीर में फाइबर की आपूर्ति करने के लिए दाल, ब्रोकली, सोयाबीन, राजमा, कीवी, अंजीर, नाशपती आदि का सेवन सर्वश्रेष्ठ रहता है। इसके अलावा पत्तेदार सब्जियां, चोकर वाला आटा, रेशेदार फल, व जई का सेवन श्रेष्ठ रहता है।

3. हरी सब्जियां:

पीसीओडी से पीड़ित होने पर महिलाओं को बालों के झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए महिलाओं को हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिसमें विटामिन प्रचुर मात्रा में होता है तथा कैलोरी कम मौजूद होती है। पीसीओडी से बचाव में पालक, चौलाई, मेथी, लौकी, भिंडी, तोरई आदि सब्जियों का सेवन उचित माना जाता है।

4. प्रोटीन से भरपूर आहार:

कोई भी बीमारी होने पर शरीर को मजबूत रहना चाहिए, इसके लिए महिलाओं को प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में जगह देनी चाहिए। शरीर में प्रोटीन की पूर्ति करने के लिए आप उबले हुए अंडे, पनीर, अंकुरित अनाज, चना चाट, चिकन, मछली आदि का सेवन कर सकती हैं। अगर पूर्ण रूप से आप शाकाहारी हैं तो दाल, पनीर, सूखे मेवे, दूध, योगर्ट, सोया इत्यादि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।

5. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार:

पीसीओडी होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन आरंभ करें। इसके लिए फल व सब्जियों के अलावा ग्रीन टी, हल्दी, लौंग, मूंगफली आदि को अपने आहार में शामिल करें। हालांकि इस बात का भी ध्यान रखें कि जो खाद्य पदार्थ आप ले रहे हैं, उनमें शर्करा का स्तर अधिक न हो, क्योंकि इससे मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।

6. भरपूर पानी पिएं:

पीसीओडी होने पर अपने शरीर में पानी का उचित स्तर बनाए रखें इससे आपको माहवारी के दिनों में दर्द कम होगा। पीसीओडी होने पर अपनी दिनचर्या में आवश्यक रूप से 8-10 गिलास पानी पिएं। अगर सादा पानी पीने का मन नहीं करता तो नींबू पानी भी पी सकते हैं।

7. खाने में आयरन की मात्रा पर दें ध्यान:

महिलाओं को पीसीओडी से पीड़ित होने पर अनियमित माहवारी के सामना करना पड़ता है। इस दौरान कई बार अधिक रक्तस्राव भी होता है जो शरीर में आयरन की कमी का कारण बन सकता है। ऐसे में महिलाओं को आयरन से भरपूर पालक, अंकुरित दाल, छोले, कीनूआ, गुड़, चिकन या अन्य मांस का सेवन करना चाहिए। संभव हो तो भोजन भी लोहे की कढ़ाही में तैयार करें।

इसके अलावा महिलाओं को अपने आहार में दुग्ध उत्पाद, संतरा, पालक, ऑर्गन मीट, मछली आदि का सेवन करने से भी लाभ होता है।

 

ये भी पढ़े: Heart Patient Diet in Hindi: क्या खाने से स्वस्थ बना रहेगा आपका हृदय स्वस्थ?

 

पीसीओडी में क्या खाने से करना चाहिए परहेज?

पीसीओडी में जैसे एक निश्चित किस्म के खाद्य पदार्थ लेने से लाभ होता है, वहीं कुछ खाद्य पदार्थ आपकी समस्या को बढ़ा भी सकते हैं। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को निम्न खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम अथवा बिल्कुल नहीं करना चाहिए:-

 

  • पीसीओडी से पीड़ित होने पर महिलाओं को संसाधित खाद्य पदार्थों यानि कि प्रोसेस्ड फूड से दूर रहना चाहिए। महिलाओं को अपने आहार में लो शुगर फूड का सेवन करना चाहिए तथा बिस्कुट, पैकेटबंद मीट, केक, चीनी, ब्रेड, डिब्बाबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • महिलाओं को पीसीओडी से पीड़ित होने की स्थिति में ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जिनमें सैचुरेटेड व ट्रांस फैट मौजूद हो। आसान शब्दों में पीसीओडी होने पर चीज़, क्रीम, तला हुआ आहार, पैकेट में मिलने वाले चिप्स, नमकीन, पिज़्ज़ा, बर्गर, मीट आदि खाने से बचना चाहिए। अगर इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन किया जाए तो वजन तेजी से बढ़ सकता है।
  • सोया प्रोडक्ट्स का सेवन भी पीसीओडी से परेशान महिलाओं को कम से कम करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, जो कि समस्या को बढ़ा सकता है।
  • महिलाओं को पीसीओडी होने पर घर पर बना खाना ही खाना चहिए। पीसीओडी होने पर कोशिश करनी चाहिए कि बाजार का फ़ास्ट फ़ूड, व पैक्ड स्नैक्स जैसे चिप्स, कुरकुरे, नमकीन आदि का सेवन कम से कम रहे।
  • महिलाओं को पीसीओडी होने पर मीठे से भी परहेज करना चाहिए। अगर कुछ मीठा खाने की क्रेविंग्स हों तो फलों जैसे तरबूज़, आम, खरबूज, खजूर आदि का सेवन करें।
  • पीसीओडी होने पर महिलाओं को धूम्रपान व मदिरापान पूरी तरह से त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे समस्या बढ़ सकती है।

पीसीओडी से बचाव के लिए व्यायाम- Exercise for PCOD Problem in Hindi

पीसीओडी होने पर पौष्टिक आहार के साथ-साथ स्वस्थ जीवन शैली अपनाना भी आवश्यक है। निम्न योगासनों को नियमित रूप से करके आप पीसीओडी में राहत पा सकती हैं। 

उष्ट्रासन:

इस योगासन को करने के लिए घुटनों के बल बैठें। अब पैरों को पीछे करके धीरे-धीरे सिर को भी पीछे की तरफ़ झुकाना आरंभ करें। अपने हाथों को पीछे की ओर करके एड़ियों को पकड़ लें और गहरी सांस लेकर कुछ सेकंड्स तक इसी मुद्रा में रहें। अब सांस छोड़कर सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराएं।

भुजंगासन:

ज़मीन पर पेट के बल लेटकर हथेलियों को ज़मीन पर रखें। अब दोनों हथेलियों पर ज़ोर देते हुए अपने शरीर के ऊपरी भाग को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान एड़ियां सीधी और ऊपर की ओर रहनी चाहिए। लगभग एक मिनट तक इस मुद्रा में रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं और पुनः दोहराएं। 

मार्जरासन:

इस योगासन को करने के लिए ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ जाइए। एड़ियों को ऊपर की ओर रखते हुए आगे की तरफ झुकिए और दोनों हथेलियों को जमीन पर टिका दीजिए। इस तरह सिर समेत पूरी बॉडी को आगे की तरफ झुकाकर कुछ क्षण बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाइए। 

उपरोक्त आसनों के अलावा सूर्य नमस्कार, तितली आसन, व चक्की चलनासन से भी पीसीओडी में राहत मिलती है। इस समस्या से राहत पाने के लिए योगासनों के साथ-साथ नियमित रूप से 1-2 किमी वॉक भी अवश्य करें। इससे वजन नियंत्रित रहेगा तथा हार्मोनल बैलेंस बना रहेगा।

पीसीओडी के घरेलू उपाय:

पीसीओडी से राहत पाने के लिए आप निम्न घरेलू उपायों का सहारा भी ले सकते हैं:- 

  • एक कप गर्म पानी में दालचीनी मिलाकर पीना पीसीओडी से राहत दिलाता है। 
  • पुदीने की चाय पीना पीसीओडी में लाभकारी होता है। इसका कारण पुदीने का एंटी-एंड्रोजन होना है। 
  • पीसीओडी के लक्षण अगर अधिक उभरकर आ रहे हैं तो अलसी के बीज के पाउडर को गरम पानी में मिलाकर पीना लाभदायक होता है। 
  • मेथी के बीजों को रात में भिगोकर सुबह शहद के साथ लेना पीसीओडी में राहत दिलाता है। इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। 
  • मुलेठी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर पीने से पीसीओडी में राहत मिलती है।  

 

 

 

पीसीओडी की समस्या से आज लगभग हर उम्र की महिलाएं परेशान हैं। इस आर्टिकल में हमने आपसे पीसीओडी के डाइट टिप्स साझा किए। कैसा लगा आपको हमारा ये आर्टिकल, हमें बताइये, साथ ही इसे शेयर कीजिये अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ। ऐसी ही अनमोल जानकारी और नई-नई रेसिपीज़ के लिए जुड़े रहिये BetterButter के साथ। 

 

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Himanshu Pareek

हिमांशु एक लेखक हैं और उन्हें खान-पान, आयुर्वेद, अध्यात्म एवं राजनीति से सम्बंधित विषयों पर लिखने का अनुभव है। इसके अलावा हिमांशु को घूमना, कविताएँ लिखना-पढ़ना और क्रिकेट देखना व खेलना पसंद है।

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