Home / Nutrition in Hindi (पोषण) / PCOD Diet in Hindi: कैसा आहार बचाएगा आपको पीसीओडी से? जानिए पीसीओडी से बचाव का डाइट प्लान!
लीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर यानी कि पीसीओडी कई महिलाओं के लिए परेशानी का कारण रहता है। पीसीओडी के कारण महिलाओं को माहवारी के दौरान तीव्र पीड़ा, मासिक धर्म का अनियमित आना, मुहांसे होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर पीसीओडी अधिक बढ़ जाए तो समस्या बांझपन तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पीसीओडी का मुख्य कारण शरीर में हॉर्मोनल अंसतुलन का होना होता है जिसे पौष्टिक डाइट लेकर और एक जीवनशैली अपनाकर नियंत्रित किया जा सकता है। इस आर्टिकल, PCOD Diet in Hindi में हम जानेंगे कि पीसीओडी होने पर कैसी डाइट लेना उचित रहता है, जिससे पीसीओडी में राहत मिल सके। साथ ही जानेंगे कि पीसीओडी होने पर किन चीजों से दूरी है ज़रूरी। तो आइये जानते हैं विस्तार से।
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पीसीओडी का मतलब होता है पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर। यह एक स्त्री रोग है जिसके होने पर महिलाओं के शरीर में शरीर में हार्मोन का असंतुलन स्थापित हो जाता है। पीसीओडी की समस्या होने पर महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन व टेस्टोस्टेरोन का स्राव अधिक होने लगता है। इससे महिलाओं के अंडाशय यानी ओवरी में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं।
पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं की ओवरी का आकार भी सामान्य ओवरी से बड़ा होता है। यह समस्या किशोरावस्था से लेकर वयस्क उम्र की महिलाओं में देखी जाती है। पीसीओडी होने पर सबसे अधिक समस्याएं महिलाओं के मासिक धर्म से संबंधित होती हैं, जिनमें मासिक धर्म का देर से आना (कभी-कभी तीन महीने के देरी से भी) मासिक धर्म के समय शरीर में तीव्र पीड़ा होना, रक्तस्राव असामान्य होना आदि प्रमुख है। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं की प्रजनन क्षमता भी कम हो जाती है।
पीसीओडी का मुख्य कारण महिलाओं के हॉर्मोन में असंतुलन का होना होता है। पीसीओडी एक स्त्री रोग है जो मुख्य रूप से 15 से 45 वर्ष की महिलाओं में होता है। पीसीओडी होने पर महिलाओं की प्रजनन क्षमता व माहवारी प्रक्रिया सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। पीसीओडी की पहचान निम्न लक्षणों से की जा सकती है:-
पीसीओडी का संबंध हार्मोन से है। विशेषज्ञों के अनुसार पीसीओडी का मुख्य कारण तनावपूर्ण जीवन शैली, खान पान की अनियमितता व अधिक स्ट्रेस होता है। इसलिए बेहतर है कि इन सभी समस्याओं से बचने के लिए पौष्टिक एवं स्वच्छ आहार का सेवन किया जाए और स्वस्थ जीवन शैली अपनाई जाए।
महिलाएं विटामिन युक्त फलों, इंफ्लेमेटरी गुणों से युक्त खाद्य पदार्थों, व फाइबर रिच आहार का सेवन करके पीसीओडी में राहत पा सकती हैं। इससे महिलाओं का वजन नियंत्रित रहता है, शरीर में हार्मोनल संतुलन बना रहता है और गांठों में सूजन कम होने लगती है।
पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं के लिए आहार का विशेष महत्व है। उन्हें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो कि पोषण से भरपूर, औषधीय गुणों से युक्त और वजन घटाने में कारगर हो (Diet for PCOD Patients)। इसके अलावा महिलाओं को ऐसे भोजन से बचना चाहिए जिससे पीसीओडी की समस्या बढ़ सकती हो। आइए जानते हैं पीसीओडी में क्या खाएं और क्या नहीं?
पीसीओडी से राहत पाने के लिए महिलाओं को निम्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। शरीर को पोषण प्रदान करने के साथ-साथ ये डाइट मदद करेगी आपकी PCOS के दौरान वजन कम रखने में (PCOS Diet for Weight Loss in Hindi)।
पीसीओडी होने पर महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है। अधिक बढ़ा हुआ वजन पीसीओडी की समस्या को और बढ़ा सकता है। ऐसे में महिलाओं को कोशिश करनी चाहिए कि वे सैचुरेटेड और ट्रांस फैट लेने से बचें क्योंकि इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है। बेहतर है कि पीसीओडी होने पर असंतृप्त वसा जैसे वेजिटेबल ऑयल, कैनोला तेल, सूरजमुखी के तेल, सरसों के तेल, नारियल के तेल, अखरोट, बादाम आदि का सेवन किया जाए।
पीसीओडी के दौरान महिलाओं को वजन कम करने में उपाय तलाशने चाहिए। इसमें फाइबर युक्त आहार आपकी मदद कर सकता है। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को दिनभर में 20-25 ग्राम फ़ाइबर का सेवन करना चाहिए। शरीर में फाइबर की आपूर्ति करने के लिए दाल, ब्रोकली, सोयाबीन, राजमा, कीवी, अंजीर, नाशपती आदि का सेवन सर्वश्रेष्ठ रहता है। इसके अलावा पत्तेदार सब्जियां, चोकर वाला आटा, रेशेदार फल, व जई का सेवन श्रेष्ठ रहता है।
पीसीओडी से पीड़ित होने पर महिलाओं को बालों के झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए महिलाओं को हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिसमें विटामिन प्रचुर मात्रा में होता है तथा कैलोरी कम मौजूद होती है। पीसीओडी से बचाव में पालक, चौलाई, मेथी, लौकी, भिंडी, तोरई आदि सब्जियों का सेवन उचित माना जाता है।
कोई भी बीमारी होने पर शरीर को मजबूत रहना चाहिए, इसके लिए महिलाओं को प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में जगह देनी चाहिए। शरीर में प्रोटीन की पूर्ति करने के लिए आप उबले हुए अंडे, पनीर, अंकुरित अनाज, चना चाट, चिकन, मछली आदि का सेवन कर सकती हैं। अगर पूर्ण रूप से आप शाकाहारी हैं तो दाल, पनीर, सूखे मेवे, दूध, योगर्ट, सोया इत्यादि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
पीसीओडी होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन आरंभ करें। इसके लिए फल व सब्जियों के अलावा ग्रीन टी, हल्दी, लौंग, मूंगफली आदि को अपने आहार में शामिल करें। हालांकि इस बात का भी ध्यान रखें कि जो खाद्य पदार्थ आप ले रहे हैं, उनमें शर्करा का स्तर अधिक न हो, क्योंकि इससे मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
पीसीओडी होने पर अपने शरीर में पानी का उचित स्तर बनाए रखें इससे आपको माहवारी के दिनों में दर्द कम होगा। पीसीओडी होने पर अपनी दिनचर्या में आवश्यक रूप से 8-10 गिलास पानी पिएं। अगर सादा पानी पीने का मन नहीं करता तो नींबू पानी भी पी सकते हैं।
महिलाओं को पीसीओडी से पीड़ित होने पर अनियमित माहवारी के सामना करना पड़ता है। इस दौरान कई बार अधिक रक्तस्राव भी होता है जो शरीर में आयरन की कमी का कारण बन सकता है। ऐसे में महिलाओं को आयरन से भरपूर पालक, अंकुरित दाल, छोले, कीनूआ, गुड़, चिकन या अन्य मांस का सेवन करना चाहिए। संभव हो तो भोजन भी लोहे की कढ़ाही में तैयार करें।
इसके अलावा महिलाओं को अपने आहार में दुग्ध उत्पाद, संतरा, पालक, ऑर्गन मीट, मछली आदि का सेवन करने से भी लाभ होता है।
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पीसीओडी में जैसे एक निश्चित किस्म के खाद्य पदार्थ लेने से लाभ होता है, वहीं कुछ खाद्य पदार्थ आपकी समस्या को बढ़ा भी सकते हैं। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को निम्न खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम अथवा बिल्कुल नहीं करना चाहिए:-
पीसीओडी होने पर पौष्टिक आहार के साथ-साथ स्वस्थ जीवन शैली अपनाना भी आवश्यक है। निम्न योगासनों को नियमित रूप से करके आप पीसीओडी में राहत पा सकती हैं।
इस योगासन को करने के लिए घुटनों के बल बैठें। अब पैरों को पीछे करके धीरे-धीरे सिर को भी पीछे की तरफ़ झुकाना आरंभ करें। अपने हाथों को पीछे की ओर करके एड़ियों को पकड़ लें और गहरी सांस लेकर कुछ सेकंड्स तक इसी मुद्रा में रहें। अब सांस छोड़कर सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को तीन से चार बार दोहराएं।
ज़मीन पर पेट के बल लेटकर हथेलियों को ज़मीन पर रखें। अब दोनों हथेलियों पर ज़ोर देते हुए अपने शरीर के ऊपरी भाग को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान एड़ियां सीधी और ऊपर की ओर रहनी चाहिए। लगभग एक मिनट तक इस मुद्रा में रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं और पुनः दोहराएं।
इस योगासन को करने के लिए ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ जाइए। एड़ियों को ऊपर की ओर रखते हुए आगे की तरफ झुकिए और दोनों हथेलियों को जमीन पर टिका दीजिए। इस तरह सिर समेत पूरी बॉडी को आगे की तरफ झुकाकर कुछ क्षण बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाइए।
उपरोक्त आसनों के अलावा सूर्य नमस्कार, तितली आसन, व चक्की चलनासन से भी पीसीओडी में राहत मिलती है। इस समस्या से राहत पाने के लिए योगासनों के साथ-साथ नियमित रूप से 1-2 किमी वॉक भी अवश्य करें। इससे वजन नियंत्रित रहेगा तथा हार्मोनल बैलेंस बना रहेगा।
पीसीओडी से राहत पाने के लिए आप निम्न घरेलू उपायों का सहारा भी ले सकते हैं:-
पीसीओडी की समस्या से आज लगभग हर उम्र की महिलाएं परेशान हैं। इस आर्टिकल में हमने आपसे पीसीओडी के डाइट टिप्स साझा किए। कैसा लगा आपको हमारा ये आर्टिकल, हमें बताइये, साथ ही इसे शेयर कीजिये अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ। ऐसी ही अनमोल जानकारी और नई-नई रेसिपीज़ के लिए जुड़े रहिये BetterButter के साथ।
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